आज है बसंत पंचमी जाने कैसे करे देवी सरस्वती की पूजा

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आज है बसंत पंचमी जाने कैसे करे सरस्वती पूजा
आज है बसंत पंचमी जाने कैसे करे सरस्वती पूजा

सरस्वती पूजा वसंत पंचमी

माघ महीने (January 21-february19) की शुक्ल पंचमी को बसन्त पंचमी के नाम से जाना जाता है। बसंत की शुरुआत इस दिन से होती है। इसको बुद्धि, ज्ञान और कला की देवी सरस्वती जी की पूजा-आराधना के दिन के रूप में मनाया जाता है। मौसमी फूलों और फलों और चंदन से सरस्वती पूजा की जाती है। सरस्वती को अच्छे व्यवहार, बुद्धिमत्ता, आकर्षक व्यक्तित्व, संगीत का प्रतीक भी माना जाता है।

सरस्वती पूजा करने की विधि:

सामग्री:

  • मूर्ति: देवी सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर।
  • पूजा की थाली: थाली में चावल, रोली, चंदन, फूल, फल, मिठाई, दीपक, अगरबत्ती, और नारियल रखें।
  • पान: पान के पत्ते, सुपारी, इलायची, लौंग, और तुलसी दल।
  • कलाक: कलाक (कलश) में जल भरकर उसमें आम के पत्ते, सुपारी, नारियल, और मौली बांधें।
  • वस्त्र: पीले या सफेद रंग के वस्त्र।

सरस्वती पूजा विधि:

  1. स्नान: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. स्थान: पूजा के लिए एक स्वच्छ स्थान चुनें।
  3. चौकी: लकड़ी की चौकी पर पीले या सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं।
  4. मूर्ति: देवी सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर चौकी पर स्थापित करें।
  5. आवाहन: देवी सरस्वती का आवाहन करें।
  6. स्नान: देवी सरस्वती को दूध, दही, घी, शहद, और जल से स्नान कराएं।
  7. वस्त्र: देवी सरस्वती को पीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनाएं।
  8. आभूषण: देवी सरस्वती को आभूषण पहनाएं।
  9. फूल: देवी सरस्वती को फूल अर्पित करें।
  10. फल: देवी सरस्वती को फल अर्पित करें।
  11. मिठाई: देवी सरस्वती को मिठाई अर्पित करें।
  12. दीपक: दीपक जलाएं और अगरबत्ती जलाएं।
  13. नारियल: नारियल अर्पित करें।
  14. पान: पान अर्पित करें।
  15. मंत्र: देवी सरस्वती के मंत्रों का जाप करें।
  16. आरती: देवी सरस्वती की आरती करें।
  17. प्रसाद: प्रसाद ग्रहण करें।

सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त:

वर्ष 2024 में सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त 14 फरवरी को सुबह 7:25 बजे से 12:30 बजे तक है।

      ॐ ऐं सरस्वते ऐं नमः।   
   ॐ ऐं ह्रीं श्रींं श्रीशारदायै नमः।
 ॐ विष्णुमायायै च विदमहे शारदायै धीमहि भगवती: प्रचोदयात्।
  1. प्रात:काल स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें।
  2. मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें तत्पश्चात कलश स्थापित कर प्रथम पूज्य गणेश जी का पंचोपचार विधि पूजन उपरांत सरस्वती का ध्यान करें

ध्यान मंत्र

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापनीं ।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।।

हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् ।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।।

  1. मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं।
  2. माता का श्रंगार कराएं ।
  3. माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं।
  4. प्रसाद के रुप में खीर अथवा दुध से बनी मिठाईयों का भोग लगाएं।
  5. श्वेत फूल माता को अर्पण करें।
  6. तत्पश्चात नवग्रह की विधिवत पूजा करें।

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा के साथ सरस्वती चालीसा पढ़ना और कुछ मंत्रों का जाप आपकी बुद्धि प्रखर करता है। अपनी सुविधानुसार आप ये मंत्र 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं।

सरस्वती पूजा निम्न मंत्र या इनमें किसी भी एक मंत्र का यथा सामर्थ्य जाप करें-

  1. सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने
    विद्यारूपा विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तुते॥
  2. या देवी सर्वभूतेषू, मां सरस्वती रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
  3. ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां सर्व विद्यां देही दापय दापय स्वाहा।।
  4. एकादशाक्षर सरस्वती मंत्र
    ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।
  5. वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
    मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणी विनायकौ।।
  6. सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नम:।
    वेद वेदान्त वेदांग विद्यास्थानेभ्य एव च।।
    सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने।
    विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते।।
  7. प्रथम भारती नाम, द्वितीय च सरस्वती
    तृतीय शारदा देवी, चतुर्थ हंसवाहिनी
    पंचमम् जगतीख्याता, षष्ठम् वागीश्वरी तथा
    सप्तमम् कुमुदीप्रोक्ता, अष्ठमम् ब्रह्मचारिणी
    नवम् बुद्धिमाता च दशमम् वरदायिनी
    एकादशम् चंद्रकांतिदाशां भुवनेशवरी
    द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेनर:
    जिह्वाग्रे वसते नित्यमंब्रह्मरूपा सरस्वती ।

सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने
विद्यारूपा विशालाक्षि विद्या देहि नमोस्तुते”

  1. स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए।

जेहि पर कृपा करहिं जन जानि।
कवि उर अजिर नचावहिं वानी॥
मोरि सुधारहिं सो सब भांति।
जासु कृपा नहिं कृपा अघाति॥

  1. गुरु गृह पढ़न गए रघुराई।
    अलप काल विद्या सब पाई॥

सरस्वती माता की आरती

जय सरस्वती माता,मैया जय सरस्वती माता।

सदागुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्यात॥

जय सरस्वती माता॥

चंद्रवदानी पद्मसिनी,द्युति मंगलकारी।

सोहे शुभा हंसा सवारी,अतुल तेजधारी॥

जय सरस्वती माता॥

बयान कारा में वीणा,दयान कारा माला।

शीश मुकुट मणि सोहे,गाला मोतियाना मल

जय सरस्वती माता॥

देवी शरणा जो ऐ,उनाका उद्धार किया।

पैठी मंथरा दासी,रावण समारा किया॥

जय सरस्वती माता॥

विद्या ज्ञान प्रदयिनी,ज्ञान प्रकाश भारो।

मोह अग्याना और तिमिरा का,जग से नशा करो जय सरस्वती माता॥

धूप दीपा फला मेवा,माँ स्विकारा करो।

ज्ञानचक्षु दे माता,जग निस्तारा करो जय सरस्वती माता॥

मां सरस्वती की आरती,जो कोई जाना दिया।

हितकारी सुखाकारीज्ञान भक्ति पावे जय सरस्वती माता॥

जय सरस्वती माता,जय जय सरस्वती माता।

सदागुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्यात॥

जय सरस्वती माता॥

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