डिजिटल अरेस्ट की बढ़ रही घटनाए, कही आपको भी तो नहीं आई फर्जी पुलिसकर्मी की कॉल, जाने क्या है डिजिटल अरेस्ट

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डिजिटल अरेस्ट की बढ़ रही घटनाए, कही आपको भी तो नहीं आई फर्जी पुलिसकर्मी की कॉल, जाने क्या है डिजिटल अरेस्ट

डिजिटल अरेस्ट की बढ़ रही घटनाए, कही आपको भी तो नहीं आई फर्जी पुलिसकर्मी की कॉल, जाने क्या है डिजिटल अरेस्ट, नोएडा में, एक आईटी-आधारित इंजीनियर को सात घंटे से अधिक समय तक स्काइप कॉल पर डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से “बंधक बनाकर” रखने के बाद 3.75 लाख रुपये की ठगी की गई। कॉल करने वाले ने उसे ” नकली पुलिस ” ने उसे बताया था कि उसके नाम से अवैध दवाओं वाला एक पैकेज पकड़ा गया है।

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गुड़गांव स्थित एक आईटी इंजीनियर से स्काइप पर दो घंटे से अधिक समय तक ऑनलाइन “पूछताछ” की गई और एक “पुलिस अधिकारी” ने एक खाते में 7 लाख रुपये स्थानांतरित करने के लिए कहा, जिसने दावा किया कि महिला के नाम से एक कूरियर का सीमा शुल्क विभाग ने पकड़ा है । कॉल करने वाले ने महिला को बताया की उसका आधार कार्ड नंबर भी कई अवैध गतिविधियों में जुड़ा हुआ है।

डिजिटल अरेस्ट क्या है ?

इसमें फर्जी पुलिसकर्मी, कस्टम ऑफिसर या अन्य बनकर साइबर ठग आपको कॉल करते हैं और कॉल कर कर कहते हैं कि आपके (पारिवारिक सदस्य) माता, पिता, भाई, बहन, पत्नी, आदि अधिकतर मामलो में लड़का या लड़की को उनके दोस्तों के साथ एक घटना में गिरफ्तार किया गया है कहा जाता है। उनको छोड़ने के लिए साइबर ठग आपसे ऑनलाइन पैसों की मांग करते हैं।

कई बार आपको कॉल आता है कि मैं इस पुलिस ऑफिस से इस शहर से बोल रहा हूं आपका नाम से एक पार्सल विदेश भेजा जा रहा था उसमें कई पासपोर्ट वह प्रतिबंधित दवाई मिली है। इसमें वह साइबर ठग विश्वास दिलाने के लिए अपना एम्पलाई कोड भी आपको बताता है व उसके बाद कस्टम ऑफिसर से बात करने को कह कर एक दूसरे व्यक्ति को कॉल पर जोड़ता है। जो आपको गिरफ़्तारी से बचाने के नाम पर पैसों की मांग करते हैं।

इन साइबर ठगो की यह कोशिश होती है कि ज्यादा से ज्यादा समय तक आपको कॉल पर उलझते हुए आपका माइंड वाश करते हुए अधिक से अधिक पैसा ठग लिया जाए कई मामलों में लोग बिना जांच किए ही डर के मारे पैसा दे देते हैं।

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचे ?

  • जब भी कोई व्यक्ति या महिला आपको अपने को पुलिसकर्मी, कस्टम ऑफिसर या कोई अन्य ऑफिसर बात कर कॉल करता है तो सबसे पहले बिना डरे घटना की पूरी जानकारी ले।
  • उस नकली अधिकारी साइबर ठग से यदि वह आपके (पारिवारिक सदस्य) माता, पिता, भाई, बहन, पत्नी, आदि अधिकतर मामलो में लड़का या लड़की, तो उससे अपने पारिवारिक सदस्यों जिनका घटना में हामिल होना बताया जा रहा है उनका नाम जरूर पूछे। क्योकि अक्सर ऐसे मामलो में साइबर ठग आपके पारिवारिक सदस्यों का नाम नहीं जानते है ।
  • बिना घबराए अपने नजदीकी थाने या साइबर क्राइम थाने पर जाकर इस काल की जानकारी साझा करें जिससे कि वह आपकी उचित सहायता कर पाए।
  • नियम के अनुसार जब भी अन्य शहर की पुलिस आपसे पूछताछ करने या गिरफ्तार करने आती है तो उसको आपके शहर की लोकल पुलिस को इसकी जानकारी देते हुए उसे पुलिस थाने के अधिकारी को साथ लेकर आपके आना होता है । इसलिए घबराना नहीं है धैर्य से काम ले व जरूरत पड़ने पर 112 नंबर डायल कर, उन्हें भी आप के पास आई काल की पूरी जानकारी दें ।

नोएडा में, एक अन्य आईटी-आधारित इंजीनियर को सात घंटे से अधिक समय तक स्काइप कॉल पर डिजिटल अरेस्ट “बंधक बनाकर” रखने के बाद 3.75 लाख रुपये की ठगी की गई। “पुलिसकर्मियों” ने उसे बताया था कि उसके नाम से अवैध ( नशीली ) दवाओं वाला एक पैकेज पकड़ा गया है।

इन दोनों मामलों में, ‘डिजिटल अरेस्ट’ के माध्यम से अपराधियों द्वारा अनजान लोगों को धोखा देने के लिए एक समान कार्यप्रणाली का इस्तेमाल किया गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इस साल जनवरी में डिजिटल गिरफ्तारी जैसे नए जमाने के अपराधों को उजागर करने वाली एक याचिका पर नोटिस जारी किया था।

बुधवार को दिल्ली पुलिस ने अपने सोशल मीडिया पेज पर एक सार्वजनिक सेवा घोषणा जारी कर नागरिकों से ऐसे घोटालों से सावधान रहने को कहा। “कुछ लोग नकली पुलिस कर्मियों या अन्य एजेंसियों के अधिकारियों को फोन करते हैं और कहते हैं कि आप डिजिटल गिरफ्तारी के तहत हैं। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि डिजिटल गिरफ्तारी के लिए कोई प्रावधान नहीं हैं। कृपया ऐसे घोटालों से सावधान रहें और उनके शिकार न बनें, ”विशेष सीपी (अपराध) शालिनी सिंह ने वीडियो में कहा।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अधिकारी चाहते हैं कि नागरिकों को ठगों द्वारा लोगों से पैसे ठगने के नए तरीकों के बारे में अपडेट किया जाए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”घोटाले का सबसे बड़ा सबूत यह है कि कानून में गिरफ्तारी का ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है।”

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