रमजान के चांद का हुआ दीदार, कल रखा जाएगा पहला रोजा

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रमजान के चांद का हुआ दीदार, कल रखा जाएगा पहला रोजा

चांद का हुआ दीदार, कल रखा जाएगा पहला रोजा, अल्लाह की इबादत का मुकद्दस महीना रमजान चांद के दीदार के साथ शुरू हो गया। सोमवार को चांद नजर का दीदार हुआ। कल मंगलवार 12 मार्च को मुसलमान रखेंगे पहला रोजा। इस बार साल का पहला रोजा सबसे छोटा और आखिरी रोजा होगा सबसे लंबा।

रमजान पर सबसे छोटे और सबसे लम्बे रोजे का समय

इस साल पहला रोजा सबसे छोटा करीब 13 घंटे 20 मिनट और आखिरी रोजा सबसे लंबा 14 घंटा 08 मिनट का होगा। रमजान को लेकर मुस्लिम समुदाय में खुशी का माहौल है। मुस्लिम बहुल इलाकों सरैया, बजरडीहा, मदनपुरा, पीलीकोठी, नई सड़क, दालमंडी, लल्लापुरा, पठानीटोला, सराय हड़हा में चांद को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल रहा।

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जहां पुरुष विशेष नमाज तरावीह को लेकर चर्चा करते रहे, वहीं बच्चे इसे लेकर उत्साहित रहते है व घरों में महिलाएं भी इबादत के साथ ही सहरी और इफ्तार को लेकर चर्चाओं में मशगूल रहीं। इलाकों में लोग नमाज की तैयारियों के तहत कुर्ता पाजामा, लुंगी और टोपी की खरीदारी भी की। जबकि मस्जिदों में भी तरावीह की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता रहा।

रमजान पर हर मुसलमान रखता है रोजा


शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया इस्लाम में रमजान का रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज किया गया है। इसे बेवजह नहीं छोड़ा जा सकता। बताया कि रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला 10 दिन रहमत का, दूसरा दस दिन मगफिरत का और आखिरी 10 दिन जहन्नम से आजादी का है। इस माह में अल्लाह तआला बंदों का खास रहमत फरमाता है। यही वजह है कि इस माह में एक फर्ज का सवाब सत्तर फर्ज के बराबर और एक नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर मिलता है।

रमजान: आत्मसंयम, त्याग और प्रेम का महीना

रमजान, जिसे रमजान-उल-मुबारक भी कहा जाता है, इस्लाम का पवित्र महीना है। यह नौवें महीने में मनाया जाता है, जो चंद्र कैलेंडर पर आधारित होता है।

रोज़ा रमजान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। इस दौरान, मुस्लिम सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं। वे पानी, भोजन और अन्य सांसारिक सुखों से दूर रहते हैं। रोज़ा आत्मसंयम, त्याग और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

इबादत रमजान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है। मुस्लिम इस महीने में अधिक से अधिक नमाज़ पढ़ते हैं, कुरान का पाठ करते हैं और दान करते हैं। वे रात में विशेष तरावीह नमाज़ भी पढ़ते हैं।

रमजान का महीना समाज में भाईचारा और समानता को बढ़ावा देता है। मुस्लिम इस महीने में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। वे एक साथ इफ्तारी करते हैं, जो सूर्यास्त के बाद रोज़ा खोला जाता है।

मुफ्ती हारून रशीन नक्शबंदी ने कहा कि 11 मार्च को रमजान के चांद के नजर आने की संभावना है। चांद नजर आया तो मस्जिदों में तरावीह शुरू हो जाएगी और पहला रोजा 12 मार्च से शुरू होगा।

रमजान का महीना मुस्लिमों के लिए एक विशेष अवसर है। यह उन्हें अल्लाह के करीब जाने और अपने जीवन में बदलाव लाने का मौका देता है। यह महीना सभी के लिए आत्मसंयम, त्याग, प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है।

तरावीह सबसे कम तीन दिन की होगी


रमजान का चांद दिखते ही रात से विशेष नमाज तरावीह की शुरुआत होगी। यह नमाज हर मस्जिदों में हाफिजे कुरान अदा कराएंगे। सबसे कम दिन तीन दिन की तरावीह होगी। इसके अलावा पांच दिन, सात दिन, 10 दिन और 15 दिनों में भी तरावीह में कुरान मुकम्मल होगा। कई मस्जिदों में पूरे माह भी तरावीह मुकम्मल होती है। जहां तरावीह मुकम्मल हो जाएगी वहां सूरह तरावीह जारी रहेगी।

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